जर्मन भाषा एवं जर्मनी में करियर पर तीन दिवसीय संगोष्ठी, 300 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया भाग
, अंतिम दिन 80 विद्यार्थियों ने अरावली की नींदड़ पहाड़ियों में की ट्रेकिंग
जयपुर। ई लैंग्वेज स्टूडियो एवं जर्मन स्पीकर्स क्लब, जयपुर की ओर से आयोजित तीन दिवसीय जर्मन भाषा एवं संस्कृति कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक गतिविधियों, सांस्कृतिक संवाद और रोमांचक ट्रेकिंग के साथ हुआ। कार्यक्रम में तीन दिनों के दौरान 300 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को जर्मन भाषा की व्यावहारिक समझ देने के साथ जर्मनी की भाषा, संस्कृति, शिक्षा और करियर की संभावनाओं से परिचित कराना था।
कार्यक्रम में जर्मन भाषा शिक्षण के अनुभवी विशेषज्ञ एवं पूर्व विश्वविद्यालय विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जे. वी. डी. मूर्ति मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ जर्मन भाषा के व्याकरण, भाषा सीखने की तकनीकों और जर्मन भाषी देशों में उपलब्ध शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अवसरों पर चर्चा की। विद्यार्थियों को भाषा सीखते समय आने वाली कठिनाइयों के समाधान और अपनी भाषा दक्षता बेहतर बनाने के व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए।
कार्यक्रम में जर्मनी से आए भारतीय-जर्मन दंपती मार्शल और कृतिका सहित वरिष्ठ शिक्षक कुणाल शर्मा, दिनेश सैनी तथा अन्य अतिथियों ने भी भाग लिया। विभिन्न सत्रों के दौरान विद्यार्थियों को भारत और जर्मनी के बीच सांस्कृतिक संबंधों, जर्मन समाज और भाषा के व्यावहारिक उपयोग को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम में ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन माध्यम से भी विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
तीसरे दिन लगभग 80 विद्यार्थियों ने अरावली पर्वतमाला की नींदड़ पहाड़ियों में ट्रेकिंग की। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रकृति के बीच समय बिताने, शारीरिक सक्रियता, टीमवर्क और सामूहिक अनुशासन का अनुभव मिला। विद्यार्थियों ने समूह में ट्रेकिंग करते हुए उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस प्रकार कार्यक्रम का समापन कक्षा से बाहर सीखने और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने वाली गतिविधि के साथ हुआ।
ई लैंग्वेज स्टूडियो के संस्थापक एवं जर्मन स्पीकर्स क्लब के संयोजक देवकरण सैनी ने बताया कि संस्थान का उद्देश्य केवल विदेशी भाषा सिखाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भाषा के माध्यम से शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अवसरों से जोड़ना भी है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अनुभवी शिक्षकों से सीधे संवाद करने, अपनी शंकाओं का समाधान पाने और अन्य विद्यार्थियों के साथ सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि जर्मन भाषा का ज्ञान भारत और जर्मनी के बीच बढ़ते शैक्षणिक एवं व्यावसायिक संबंधों के संदर्भ में युवाओं के लिए नए अवसर खोल सकता है। संस्थान भविष्य में भी भाषा शिक्षण, सांस्कृतिक गतिविधियों और करियर मार्गदर्शन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।
तीन दिवसीय आयोजन ने विद्यार्थियों को भाषा अध्ययन के साथ विशेषज्ञों से संवाद, सांस्कृतिक अनुभव और प्रकृति के बीच सामूहिक गतिविधियों का अवसर प्रदान किया।
